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Prithvi Vigyan Yojana 2024: योजना को मिला 4797 करोड़ रूपये का बजट | पृथ्वी विज्ञान योजना

Table of Contents

Prithvi Vigyan Yojana 2024

योजना का नामपृथ्वी विज्ञान योजना
किसने शुरू कीभारत सरकार ने
कब शुरू की गईसन 2024
लाभदेश की अपदाओ से बचने के लिए किये जायेंगे कार्य
लाभार्थीदेशवासी
अधिकारिक वेबसाइटजल्द ही
हेल्पलाइन नंबरजल्द ही

पृथ्वी विज्ञान योजना क्या है?

पृथ्वी विज्ञान योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो पृथ्वी के वायुमंडल, महासागर, भूमंडल और ठोस पृथ्वी के बारे में हमारी समझ को बढ़ाने के लिए बनाई गई है। यह योजना 2024 से 2030 तक चलेगी और इसकी अनुमानित लागत ₹4,797 करोड़ है।

पृथ्वी विज्ञान योजना का बजट

पृथ्वी विज्ञान योजना का बजट ₹4,797 करोड़ है। यह बजट 2024 से 2030 तक के लिए है। यह बजट योजना के पांच प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित है:

  • वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाएँ (ACROSS): ₹1,200 करोड़
  • महासागर सेवाएँ, मॉडलिंग अनुप्रयोग, संसाधन और प्रौद्योगिकी (O-SMART): ₹1,000 करोड़
  • ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER): ₹600 करोड़
  • भूकंप विज्ञान और भूविज्ञान (SAGE): ₹600 करोड़
  • अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच (REACHOUT): ₹997 करोड़

पृथ्वी विज्ञान योजना के पाँच पहलू

  • वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाएँ (ACROSS): यह क्षेत्र वायुमंडल और जलवायु परिवर्तन के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, अवलोकन और मॉडलिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • महासागर सेवाएँ, मॉडलिंग अनुप्रयोग, संसाधन और प्रौद्योगिकी (O-SMART): यह क्षेत्र महासागरों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, अवलोकन, मॉडलिंग और प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER): यह क्षेत्र ध्रुवीय क्षेत्रों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, अवलोकन और मॉडलिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • भूकंप विज्ञान और भूविज्ञान (SAGE): यह क्षेत्र भूकंप और भूविज्ञान के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, अवलोकन और मॉडलिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच (REACHOUT): यह क्षेत्र पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

पृथ्वी विज्ञान योजना के उद्देश्य

  • पृथ्वी की जटिल प्रणालियों के बारे में हमारी समझ को बढ़ाना।
  • प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने में मदद करना।
  • समुद्री और ध्रुवीय संसाधनों का सतत उपयोग करना।
  • पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।

पृथ्वी विज्ञान योजना के लाभ तथा विशेषताएं

पृथ्वी विज्ञान योजना के लाभ

  • पृथ्वी की जटिल प्रणालियों के बारे में हमारी समझ को बढ़ाना: पृथ्वी विज्ञान योजना हमें पृथ्वी के वायुमंडल, महासागर, भूमंडल और ठोस पृथ्वी के बारे में अधिक जानने में मदद करेगी। यह हमारी समझ को बेहतर बनाने में मदद करेगा कि ये प्रणालियाँ कैसे काम करती हैं और एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करती हैं।
  • प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने में मदद करना: पृथ्वी विज्ञान योजना हमें प्राकृतिक आपदाओं, जैसे चक्रवातों, बाढ़, भूकंप और सूखे, के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकती है। यह हमें इन आपदाओं को बेहतर ढंग से पूर्वानुमानित और चेतावनी देने में मदद करेगा, और हमें उनसे निपटने के लिए बेहतर तैयार करने में मदद करेगा।
  • समुद्री और ध्रुवीय संसाधनों का सतत उपयोग करना: पृथ्वी विज्ञान योजना हमें समुद्री और ध्रुवीय संसाधनों का सतत उपयोग करने में मदद कर सकती है। यह हमें इन संसाधनों की बेहतर समझ प्रदान करेगा और हमें इनका उपयोग अधिक कुशलता से करने के तरीके खोजने में मदद करेगा।
  • पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना: पृथ्वी विज्ञान योजना पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगी। यह भारत को पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने में मदद कर सकता है।

पृथ्वी विज्ञान योजना की विशेषताएं

  • पांच प्रमुख क्षेत्र: पृथ्वी विज्ञान योजना पाँच प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी:
    • वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाएँ (ACROSS)
    • महासागर सेवाएँ, मॉडलिंग अनुप्रयोग, संसाधन और प्रौद्योगिकी (O-SMART)
    • ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER)
    • भूकंप विज्ञान और भूविज्ञान (SAGE)
    • अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच (REACHOUT)
  • बड़े बजट: पृथ्वी विज्ञान योजना का बजट ₹4,797 करोड़ है। यह बजट योजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करेगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: पृथ्वी विज्ञान योजना अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर जोर देती है। यह योजना भारत को दुनिया भर के वैज्ञानिकों और संस्थानों के साथ सहयोग करने में मदद करेगी।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को दिए गए निर्देश

इस योजना के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं जो समाज के लिए मौसम जलवायु महासागर और तटीय राज्य, जल विज्ञान, भूकंप विज्ञान और प्रगति खतरों संबंधित विज्ञान से सेवा प्रदान करना है। इसके अलावा पृथ्वी के तीन ध्रुवों(अंटार्कटिका, आर्कटिक और हिमालय) की खोज करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय को प्रदान की गई विभिन्न एजेंसियों और राज्य सरकार द्वारा द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से लोगों को बचाने और संपत्तियों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए और प्रभावित तरीकों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्रालय की मदद करने वाले संस्थान

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की मदद करने वाले 10 संस्थान के नाम नीचे दिए गए हैं। जोकि कुछ इस प्रकार है।

  1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
  2. राष्ट्रीय तटीय  अनुसंधान केंद्र (NCCR)
  3. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS)
  4. राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT)
  5. राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र (NCESS)
  6. राष्ट्रीय ध्रुव और महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR)
  7. भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र  (INCOIS)
  8. राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्व अनुमान केंद्र (NCMRWF)
  9. समुद्री जीवन संसाधन और परिस्थिति की केंद्र (CMLRE)
  10. भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM)

FAQ

पृथ्वी विज्ञान योजना क्या है?

पृथ्वी विज्ञान योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो पृथ्वी के वायुमंडल, महासागर, भूमंडल और ठोस पृथ्वी के बारे में हमारी समझ को बढ़ाने के लिए बनाई गई है। यह योजना 2024 से 2030 तक चलेगी और इसकी अनुमानित लागत ₹4,797 करोड़ है।

पृथ्वी विज्ञान योजना के लिए कितना बजट पास किया गया हैं?

4797 करोड़।

पृथ्वी विज्ञान योजना के तहत कैसे अध्ययन किया जाएगा?

पृथ्वी विज्ञान योजना के तहत संपूर्ण पृथ्वी जैसे पृथ्वी प्रणाली, समुद्र, मंडल आदि सभी का अध्ययन एक जगह किया जाएगा।

पृथ्वी विज्ञान योजना को किसके द्वारा जारी किया गया हैं?

केंद्रीय मंत्रिमंडल के द्वारा

पृथ्वी विज्ञान योजना का लाभ कैसे मिलेगा?

इसके लिए किसी भी आवेदन की जरूरत नहीं है, यह एक विकास योजना की तरह की है।

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